डालिम्स सनबीम स्कूल गांधीनगर में राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्वामी विवेकानंद के विचारो से विद्यार्थियों में जागी नई ऊर्जा

 

 

शिक्षा चरित्र निर्माण, सर्वांगीण विकास, स्वतंत्र सोच का सशक्त पथ: हर्ष राय

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर में सोमवार को  प्रार्थना सभा के पश्चात वेदांत दर्शन के प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को  राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन सम्पन्न हुआ.

 

श्रद्धांजलि सभा की स्थापना प्रार्थना सभा में असाधारण स्मरण शक्ति, बहुआयामी ज्ञान, तर्कपूर्ण विवेकानंद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शिक्षा और चरित्र निर्माण पर जोर तथा राष्ट्रवाद और समाज सुधार के लिए अनुपम योगदान देने वाले विख्यात विचारक स्वामी विवेकानंद के तैलचित्र पर पुष्पार्पित कर किया गया.

तत्पश्चात श्रद्धांजलि सभा के समक्ष डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की नौवीं कक्षा की छात्रा शिवांगी सिंह ने कोरे काग़ज़ और क़लम के प्रायोगिक प्रदर्शन से शिक्षा के बौद्धिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और नैतिक महत्ता का शब्द निरूपण किया.

स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर संकल्पित राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवा शक्ति पर आधारित अपने महत्वपूर्ण उद्बोधन में डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के निदेशक हर्ष राय ने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र और समाज की रीढ़ होती है, जो ऊर्जा, नई सोच और बदलाव की क्षमता से परिपूर्ण होती है, और देश के विकास, प्रगति और भविष्य के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाती है. स्वामी विवेकानंद जी के स्वप्न और संघर्ष के योगदान में शिक्षा और सही मार्गदर्शन के साथ, युवा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सुधार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देकर ‘विकसित भारत’ का सपना ही हम सबका उद्देश्य है.

श्रद्धांजलि सभा के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की प्रधानाचार्या डॉ. प्रेरणा राय ने कहा कि आज के इस डिजिटल और आधुनिक युग में हमें स्वामी विवेकानंद जी के विचारों की और भी अधिक आवश्यकता है. आज राष्ट्रीय युवा दिवस का असली उद्देश्य केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उनके पदचिन्हों पर चलना है. हमें अपनी ऊर्जा का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज की कुरीतियों को मिटाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करना चाहिए.
उन्होंने विस्तृत कहा कि 2026 के इस दौर में जहां तकनीक और चुनौतियां दोनों बढ़ रही हैं, हमें स्वामी विवेकानंद जी के ‘चरित्र निर्माण’ और ‘अनुशासन’ के संदेश को अपनाना होगा. हमें अपनी बुद्धि को आधुनिक और अपने संस्कारों को भारतीय बनाए रखना होगा.श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता निदेशक हर्ष राय और संचालन छात्रा अतुल्या राय ने किया।