(रिपोर्ट-अजय कुमार यादव )

झंडारोहण के बाद वीर सपूतों को किया जाएगा नमन
गाजीपुर (मुहम्मदाबाद):देश को आजाद कराने के लिए गांधी जी के आह्वान पर शेरपुर के आठ नौजवानों ने मुहम्मदाबाद तहसील भवन पर तिरंगा फहराते हुए 18 अगस्त 1942 को अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इसे मुहम्मदाबाद की क्रांति के नाम से जाना जाता है। प्रति वर्ष इस तिथि को शहीद दिवस के रूप में मना कर उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अंग्रेजों भारत छोड़ो का उद्घोष करते ही पूरे देश में नौ अगस्त 1942 से अहिंसक आंदोलन शुरू हो गया था। इसे अगस्त क्रांति के नाम से जाना जाता है। अगस्त क्रांति के इतिहास में महाराष्ट्र में सतारा, बंगाल में मिदनापुर और उत्तर प्रदेश में बैरिया बलिया तथा मुहम्मदाबाद गाजीपुर की क्रांति स्वर्णाक्षरों में अंकित की जाने वाली अनुपम क्रांति है। 18 अगस्त 1942 को मुहम्मदाबाद तहसील भवन के सामने क्रांति हुई थी। इसका नेतृत्व डॉ. शिवपूजन राय ने किया था। नौ अगस्त को गौसपुर हवाई अड्डे को तहस-नहस कर दिया गया। क्रांतिकारियों ने मुहम्मदाबाद पोस्ट आफिस को फूंक दिया था। इसके बाद 17 अगस्त को शेरपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल में क्रांतिकारियों की बैठक हुई और तय किया गया कि इस इलाके को आजाद करा लेना है। मुहम्मदाबाद तहसील भवन पर यूनियन जैक लहराने नहीं दिया जाएगा। उस समय इलाके में बाढ़ आई हुई थी।
शेरपुर शहीद बाग से दो हजार से ज्यादा युवकों की टोली ने मुहम्मदाबाद की तरफ कूच किया। कुछ नाव से चले तो कुछ तैरते हुए आए। मुहम्मदाबाद से पहले नई रणनीति बनाई गई। टीम को दो टोलियों में बांट दिया गया। तय था कि कोई अंग्रेजों के दमन का प्रतिकार नहीं करेगा। एक टोली पीछे से जाकर अंग्रेज सिपाहियों की बंदूकें छीन लेगी। टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. शिवपूजन राय सामने की तरफ से तहसील भवन में दाखिल हुए। डॉ. तिलेश्वर राय के नेतृत्व वाली टोली पीछे से दाखिल हुई। आंदोलन की तीव्रता की सूचना पर गाजीपुर का कलेक्टर मुनरो भी वहां पहुंच गया था। पीछे से आई टोली ने दो सिपाहियों को काबू में कर लिया उनकी बंदूकें छीन ली गई लेकिन तब तक सामने की तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई थी। पदलोलुप भारतीय तहसीलदार ने पदोन्नति के लोभ में क्रूरता का नग्न तांडव किया और जुलूस के पहुंचते ही गोलियां चलवा दीं। समूह में भगदड़ मच गई लेकिन आजादी के दीवाने डॉ. राय निर्भीकता से तहसीलदार को गोली चलाने के लिए ललकारते हुए हाथ में तिरंगा लिए तहसील भवन की ओर बढ़े। तब तक भारत मां चीख उठीं, उनका लाल उनके आंचल में सदा के लिए सो गया।
इसी तरह वंशनारायण राय, रामबदन उपाध्याय, वशिष्ठ राय, ऋषेश्वर राय, नारायण राय, राजनारायण राय एवं वंशनारायण राय (द्वितीय) सभी शेरपुर के शेर स्वतंत्रता की बलिवेदी पर आहुत हो गए। इस बलिदान की विशेषता थी कि शहीद होने वाले लोगों में कई लोग बंदूक चलाना जानते थे लेकिन सिपाहियों से बंदूक छीन लेने के बाद भी कोई फायर नहीं किया गया। वजह नेता का आदेश ऐसा नहीं था।
आठ लोगों के शहीद होने के बाद उग्र हो गया था आंदोलन
अंग्रेजों की गोलियों से आठ क्रांतिकारियों के शहीद होने के बाद आंदोलन और उग्र हो गया। अंग्रेज सिपाहियों ने शेरपुर गांव में सात दिन बाद कहर बरपाया। 29 अगस्त 1942 को अंग्रेजी फौज लगाकर शेरपुर गांव में लूटपाट और आगजनी की गई। भागते हुए पुरुषों एवं महिलाओं पर गोलियां चलाई। इसमें तीन लोग रमाशंकर लाल श्रीवास्तव, खेदन सिंह यादव एवं राधिका पांडेय शहीद हो गईं। गांव में सामूहिक अर्थदंड लगाकर जबरदस्ती वसूली की गयी। उनकी याद में मुहम्मदाबाद और शेरपुर में बना शहीद पार्क, शहीद स्तंभ एवं शहीद स्मृति भवन पूरी तरह उपेक्षित पड़ा है।
सुबह दस बजे पर होगा ध्वजारोहण
मुहम्मदाबाद। स्थानीय तहसील पर 18 अगस्त 1942 को झंडा फहराते समय अपने प्राणों की आहुति देने वाले अष्ट शहीदों को बुधवार को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। शहीद स्मारक समिति के सदस्य चंदन राय ने बताया कि शहीद स्मारक पर सुबह 9 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा।9:30 बजे झांकी का अनावरण होगा। दिन में दो बजे तक पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। तीन बजे कार्यक्रम का समापन होगा।
