डालिम्स सनबीम स्कूल गांधीनगर में छठ पूजा की झांकी – छात्रों ने पारंपरिक वेशभूषा में की सूर्यदेव की आराधना

छठ पर्व संतुलन, धैर्य और समर्पण का प्रतीक: डॉ. प्रेरणा राय

करीमुद्दीनपुर :डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के सुसंस्कृत परिसर में छठ पर्व का भक्तियोग आयोजन सम्पन्न हुआ. पर्व का प्रारम्भ प्रात: अभिमुख डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के निदेशक हर्ष राय की मुक्त अध्यक्षता और संयोजन में समस्त छात्र-छात्राओं के समक्ष पूरे पवित्र बोध और रीति निर्वाह के साथ सम्पन्न हुआ.

 

डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर के प्रशासनिक संकुल के समक्ष स्थापित सुसज्जित मंच पर मंचस्थ प्रज्ञावान छात्र-छात्राओं के समूह ने अपनी लघु और दीर्घ वाग्मिता से छठ गीत की समृद्ध और स्मृतिक प्रस्तुति से वातावरण को आध्यात्मिकता में बदल दिया.

 

तत्पश्चात कक्षा सात ब, चार ब और छ: ब के छात्र-छात्राओं के समूह ने पर्व के प्रति अपने नैतिक मूल्यों से सम्पन्न अभिनेय से छठ पूजा-अर्चना की महत्तर परिभाषा को उद्धृत किया.

समारोह का बीज वक्तव्य देते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की संस्कृत शिक्षा सीमा तिवारी ने उद्बोधित किया कि छठ पूजा सूर्य, प्रकृति, जल, वायु और उनकी अनुजा छठी म‌इया को समर्पित है ताकि उन्हें पृथ्वी पर जीवन की देवतायों को बहाल किया जा सके. छठी मैया, जिसे मिथिला में रनबे माई, भोजपुरी में सबिता माई और बंगाली में रनबे ठाकुर के नाम से भी पुकारा जाता है, जिसकी महाभारत की काल कथा के अनुसार शुरुआत सूर्यपुत्र कर्ण ने की थी.

 

वह प्रतिदिन गंगा तट पर खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते थे. सूर्य की कृपा से ही वे असाधारण पराक्रमी बने और उनके कवच-कुंडल में दिव्य तेज का वास रहा. यही वजह है कि छठ पर्व को सूर्य की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम माना जाता है. द्रौपदी की कथनानुसार जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब श्री कृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने सुख-शांति और राजपाट वापस पाने के लिए छठ का व्रत रखा, जिससे उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं. राजा प्रियव्रत की कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत को संतान नहीं थी. उन्होंने मुनि से सलाह ली और छठी मैया की पूजा की, जिसके फलस्वरूप उनके मृत पुत्र को पुनः जीवन मिला. कर्ण की कथा भाषा कहती है कि सूर्य के पुत्र कर्ण ने सबसे पहले छठ पूजा की शुरुआत की. वह घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे और सूर्य देव की कृपा से ही वह एक महान योद्धा बने. उन्होंने कहा कि माता सीता की कथा कहती है कि त्रेतायुग में, ऋषि मुद्गल द्वारा बताए गए विधिनुसार माता सीता ने भी रामराज्य की स्थापना के लिए छठ व्रत रखा और सूर्यदेव की पूजा की. वस्तुतः सूर्य और छठी मैया का सम्बन्ध लोक परंपरा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मैया का संबंध भाई-बहन का है. इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना को फलदायी माना जाता है.

छठ पर्व की इस अभिराम और प्रतीकात्मक आयोजना को डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की अनुशील प्रधानाचार्या डॉ. प्रेरणा राय ने उपस्थित संकाय सदस्यों और छात्र-छात्राओं के परिषद को सम्बोधित करते हुए अपने उद्गार में कहा कि छठ पूजा आस्था, शुद्धता, तपस्या और धैर्य का प्रतीक है. छठ के घाट तक व्रती की आध्यात्मिक और धैर्यशील यात्रा एक मनोरथ यात्रा के समान है, जो भक्तों को भगवान सूर्य के प्रति अपनी कृतज्ञता और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाने का अवसर देती है. यह पर्व धैर्य और अनुशासन का प्रतीक इसलिए माना जाता है, क्योंकि इसमें कई कठिन नियमों का पालन करना होता है. डॉ. प्रेरणा राय ने विस्तृत कहा कि व्रती 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखती हैं, जो उनके अटूट धैर्य और समर्पण को जीवंत दर्शाता है. पूजा के दौरान, व्रती पवित्रता और सादगी बनाए रखती हैं. पूजा के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का ही उपयोग किया जाता है, जैसे बांस की टोकरी और फल. उन्होंने बौद्धिक के रूप में कहा कि छठ ऐसा पर्व है, जिसमें उगते और डूबते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जो जीवन चक्र और प्रकृति के प्रति सम्मान का अद्वितीय प्रतीक है. निष्कर्षत: छठ का महापर्व धीरज और संयम के साथ-साथ प्रकृति के प्रति सम्मान और आस्था का एक अनूठा संगम है.

छठ उर्फ़ कात्यायनी महापर्व के प्रतीकायोजन के अभिकल्पन और संयोजन गतिविधियों में डालिम्स सनबीम स्कूल गांधी नगर की गतिविधि प्रभारी नेहा राय द्वितीय के साथ उप-प्रधानाचार्य अमित कुमार राय के अभियोग में विद्यालय के संकाय परिषद के समस्त सदस्यों सर्वश्री नरेंद्र राय, रितेश कुमार राय, जोखन यादव, तौसीफ़ अहमद ख़ान, आशु सिंह, अजित कुमार, अंजलि राय, अनुज राय, अर्चना गुप्ता, आशुतोष यादव, अवधेश प्रसाद, धनंजय, दुर्गेश प्रताप सिंह, मधुलिका सिंह, माह-ए-तलअत, मुस्कान सोनी, नमो नारायण पांडेय, मोहम्मद मुक़ीम अंसारी, नंदिनी मिश्रा, नेहा राय, निधि राय, ओंकार नाथ तिवारी, पिंकी पांडेय, पूजा सिंह, प्रतिमा तिवारी, प्रवेश कुमार, रचना गुप्ता, रागिनी पांडेय, राजकुमारी सिंह, राम नारायण राय, रश्मि गुप्ता, रीता यादव, ऋतु यादव, रूपेश कुमार शर्मा, साक्षी मिश्रा, सत्येंद्र प्रताप सिंह, सीमा तिवारी, शालू गुप्ता, शेषनाथ यादव, श्वेता यादव, सूर्य सिंह, सुशील राय, विजय लक्ष्मी यादव, विनोद शर्मा, विश्वजीत सिंह, जाकिर अहमद, आरती सिंह, प्रिया राय, अर्शी फ़ातिमा, जागृति श्रीवास्तव, अजय कुमार पाल, रूपेश कुमार पांडेय, विश्वजीत सिंह आदि की उपस्थिति ने पर्व के मनोहर आयोजन को भव्यता प्रदान की.संचालन दीप्ति सिंह, आराध्या सिंह, अक्षिता वर्मा आदि ने संयुक्त रूप से किया.