
भावरकोल: क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गाव स्थित महावीर मंदिर परिसर में नौ दिवसीय महामृत्युंजय यज्ञ के चौथे दिन रविवार को यज्ञशाला की परिक्रमा के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

सुबह से देर रात तक परिक्रमा को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। हजारों महिला- पुरुष श्रद्धालुओ ने परिक्रमा पूरी कर सुख- शांति व समृद्धि की कामना की। इसमें शामिल लोगो के जयकारे से समूचा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। परिक्रमा के बाद श्रद्धालु भक्तो ने प्रसाद ग्रहण किया। महायज्ञ में चल रहे भंडारा में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग प्रसाद ग्रहण कर रहे है। इस अवसर पर यज्ञाध्यक्ष राजगुरु मठ के पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अनंन्तानंन्द सरस्वती जी महाराज ने युवा नेतृत्व निर्माण को लेकर गोष्ठी का आयोजन कराया ।जिसमे युवाओं में आत्मविश्वास, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए नेतृत्व कौशल विकसित करना हुआ।मंच पर युवाओं ने अपने विचार साझा करने, सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर प्राप्त हुआ।

स्वैच्छिक कार्य से युवाओं में सेवा भाव और जिम्मेदारी का बोध कराया गया। और जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अनंन्तानंन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म में पुरुषार्थ जीवन के चार प्रमुख लक्ष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जीवन को संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने का आधार हैं। ये मनुष्य को नैतिक जीवन (धर्म) जीते हुए समृद्धि (अर्थ) और सुख-इच्छा (काम) प्राप्त करने, और अंततः आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) पाने का मार्ग दिखाते हैं।

यज्ञ में चल रहे श्री रामकथा के चौथे दिन मथुरा स्थित श्री धाम वृंदावन से पधारे वृंदावन महाराज जी के द्वारा श्रीराम जन्मोत्सव का मार्मिक वर्णन किया गया। आगे कहा की जब धरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर को आना पड़ता है। भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की और लोगों का कल्याण किया।

कथा में उन्होंने राम जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शकुन होने लगा। प्रभु राम का जन्म होने पर चारों ओर खुशी का माहौल हो गया।

