कोरोना के चलते देहदान की इच्छा नही हो पाई पूरी

भांवरकोल:राष्ट्रीय आंदोलन में 18 अगस्त सन 1942 में शेरपुर गाव के आठ लोग मुहम्मदाबाद तहसील पर झंडा फहराने को लेकर शहीद हुए थे।जिनमें एक वंशनारायण राय थे।शहीद होने के समय पुत्र सुदर्शन राय की उम्र मात्र दो वर्ष थी आगे चलकर शिक्षक हुए बाद में प्रधानाचार्य हुए। विज्ञान वर्ग के शिक्षक होने के बाद भी समाजिक कार्य एवं साहित्य में रुचि था।सन 2002 में सेवानिवृत्त होने के बाद सम्पूर्ण योगदान समाजसेवा मे दिया।

एक साथ पाँच लोगो ने भरा था देहदान का संकल्प पत्र

पिता के शहादत दिवस पर 18 अगस्त सन 2017 को उन्होंने अपने पाच मित्रो संग समाजसेवी ब्रजभूषण दुबे को बुलाकर बीएचयू वाराणसी के पक्ष में देहदान के संकल्प पत्र भरे और उन्होंने ब्रजभूषण दुबे से कहा कि हर हाल में अंतिम इच्छा पूरी कराया जाए।

AIMS में हुआ निधन पार्थिव शरीर आया गाव

9 अप्रैल की सुबह इलाज के दौरान AIMS नई दिल्ली में अंतिम सांस लिया।तब उनके दोनों पुत्र इंजीनियर चन्दन राय एव उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत विनय राय सोनू एम्बुलेंस से लेकर शहीदी धरती शेरपुर ले आया जहा भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी।और शुक्रवार की सुबह बीएचयू वाराणसी रवाना हुए।

हाथ खड़ा किया बीएचयू प्रशासन

प्रधानाचार्य स्व0 सुदर्शन राय के निधन की सूचना ब्रजभूषण दुबे को दिया।और उन्होंने शरीर रचना विभागाध्यक्ष प्रो0 रैना सिंह से सम्पर्क साधा तो उन्होंने ने कहा कि पार्थिव शरीर बर्फ से ढ़की रहना चाहिए।हम ले लेंगे।ठीक वैसा ही हुआ। शुक्रवार को शेरपुर से बीएचयू वाराणसी जाते समय कई बार बात हुई।आशापुर पहुचते पहुचते उन्होंने ने बताया कि बीएचयू प्रशासन तैयार नही हो रहा है।कारण की सारा फैकल्टी बन्द है।हमने उच्चाधिकारियों से सम्पर्क साधा किन्तु सभी ने असमर्थता जता रहा है।हम इसके लिए क्षमा की मांग कर रहें है।अंत मे वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार मुखाग्निन बड़े पुत्र इंजीनियर चन्दन राय ने दिया।