प्रधानमंत्री से एक निवेदन फरमा कंपनियों के लिए कोरोना “वायरस बिजनेस”, मीडिया के लिए “कोरोना उत्सव” और आम आदमी के लिए झूठी मुसीबत :हकीम मो अबू रिज़वान

उत्तर प्रदेश लखनऊ (जावेद बिन अली द्वारा) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी का देश चीन के वुहान शहर से निकला वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। यह वायरस पूरी दुनिया में तो जरूर फैल गया लेकिन चीन मुल्क के एक शहर तक क्यों रह गया? आसमान में हवा से बातें करने वाली मिसाइल और मिसाइल की गतिविधि को देखने वाला रडार से छुपता हुआ हर देश में पहुंच गयाl इस वायरस को सभी देश के हुक्मरान अपने देश में लाने के लिए जिम्मेवार हैं। क्योंकि चीन के वुहान शहर से जितनी हवाई जहाज चली है,उनके साथ उन सभी देशों में पहुंचा है और आने वाले लोगों की सही ढंग से जांच नहीं की गई हैl क्योंकि बड़े लोगों का जांच कौन करता है ?
इसी खोज में आज मैंने झारखंड के प्रसिद्ध यूनानी फिजीशियन, “यूनानी मेडिसिन रिसर्च सेंटर” जमशेदपुर,झारखंड के प्रबंधक हकीम मो अबू रिज़वान से की गई बातचीत प्रस्तुत है।भारत सरकार को हल्ला होली करने से अच्छा है कि भारत के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक यूनानी और होम्योपैथिक डॉक्टरों की भी सलाह मशविरा लेनी चाहिए।निम्न प्रश्नों के उत्तर से पूरा राज़ खुल जाएगाl
1.क्या यह सच है पूरी दुनिया से अंग्रेज चले गए लेकिन अंग्रेजी दवाओं का गुलाम बना कर चले गएl

उत्तर :- 1947 से पहले हमारा देश अंग्रेजों का ग़ुलाम था, और आज़ादी के बाद हमलोग अंग्रेजी दवाओं के ग़ुलाम हो गये हैं।” इस अंग्रेजी दवा की आयु है ही कितनी और दूसरी ओर, इस धरती पर मानव जीवन का इतिहास कितना पुराना है? जीवन और बीमारियां साथ-साथ चलती हैं,तो जबसे जीवन, उसी समय से बीमारी, बीमारी से बचाव और ईलाज भी।
मानव शरीर “नेचर” से बना है, इसमें कोई भी समस्या आएगी तो “नेचुरल” तरीक़े से ही ठीक किया जा सकता है। अंग्रेजी दवा तो “केमिकल” है जो मानव शरीर केलिए नहीं है, ऐलोपैथिक दवा जब भी हमारे शरीर में जाएगा तो एक “टेररिस्ट” या “आतंकवादी” की तरह ही व्यवहार करेगा। दूसरी ओर, अंग्रेजी दवा से कोई भी बीमारियां कभी भी “ठीक” नहीं होती हैं,बल्कि “आराम” मिलता है, क्योंकि ये हमारे शरीर में “सिग्नलिंग सिस्टम” को ख़त्म करने का काम करती है।

प्रश्न 2. आज से पहले पूरी दुनिया मैं मेडिसिन, हकीम और वैद्य का क्या इतिहास है?

उत्तर :प्राचीन काल से ही बीमारी का इलाज करने वाले केवल “हकीम” और “वैद्य’ ही होते थे। ऐलोपैथिक दवाओं का इतिहास तो सबको पता ही है।”हकीम” और “वैद्य” का इतिहास जब से दुनिया कायम हुआ है तबसे हैll

प्रश्न 3:- पूरी दुनिया कोरोनावायरस के महामारी से बचाने में नाकाम क्यों है?

उत्तर : कोरोनावायरस” इन्फ्लूएंजा लाईक इलनेस” ही तो है, यानी कौमन कोल्ड की तरह।अगर तथ्य पर आधारित बात की जाए तो आज कोरोनावायरस के लिए जितना हंगामा किया जा रहा है कि मास्क लगाएं, सैनिटाइजर से हाथ धोएं, घरों में बंद रहें ये सब बेतुकी बातें होंगी। कोरोनावायरस कोई नया या अजूबा वायरस नहीं है। इसमें सिर्फ अजूबा ये हुआ है कि वायरस को “डीटेक्ट” करनेवाला “किट” बाज़ार में आ गया है (rtPCR test kit), जो सारे “फसाद की जड़” है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि एक बच्चा साल में छह बार वायरल फीवर (जिसे फ्लू या कौमन कोल्ड कहते हैं) का शिकार हो ही जाता है,एक इन्सान साल में एक बार वायरल फीवर का शिकार होता ही है। इसमें नया क्या है?हो सकता है उसमें कभी कोई कोरोना, स्वाईन फ्लू, डेंगू,कौमन कोल्ड,नीपाह,ज़ीका या चिकनगुनिया रहा होगा। कोरोनावायरस के चलते यूरोपीय देशों के मौतों का आंकड़ा देखने आपको लगता होगा कि ऐसा पहली बार हुआ है, जबकि सच्चाई यह है कि प्रत्येक वर्ष उन देशों में नवम्बर से अप्रैल तक के मौसम में अस्पतालों में 80-85% आई सी यू भरे होते हैं,और इतने बड़े तादाद में लोग मरते ही हैं।लेकिन इस वर्ष की भांति मीडिया के द्वारा वर्ल्ड कप क्रीकेट की तरह “लाईव कमेंट्री” कभी भी नहीं आई थी।ये एक बहुत बड़ी “साज़िश” और यह “भय का व्यापार” है।
“कोरोनावायरस महामारी फार्मा कंपनियों के लिए “कोरोना बिज़नेस”, मीडिया केलिए “कोरोना उत्सव”, आम आदमी केलिए “झूठी मुसीबत।”

प्रश्न नंबर 4:- यूनानी व आयूर्वेदिक पद्धति भारत का वैदिक कालीन इतिहास होने के बावजूद भी सरकार इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है?

उत्तर : आज दुनिया को लीड करने वाले “मुर्ख लोग” हैं। अंग्रेजी दवा का कारोबार ट्रीलियन डालर का होता है,बल्कि उससे भी ज्यादा। डब्ल्यू एच ओ एक संस्था है जो हमारे स्वास्थ्य का “ठीकेदार” है।सारे देश उसके मेंबर हैं।जब मेंबर हैं तो अपने “मुखिया” की हर बात अक्षरशः मानेंगे भी।भारत तो अंग्रेजों का गुलाम था, हमें तो ग़ुलामी की आदत है। ऐलोपैथिक दवा कंपनियों की ओर से सबसे ज्यादा चंदा सरकार को, पार्टी को मिलता है। यानी सब “पैसों का खेल” है।
यूनानी व आयूर्वेदिक चिकित्सा पद्धति तो मेरे देश की अग्रणी चिकित्सा पद्धति होनी चाहिए थी लेकिन आज ये “वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति” बना दिया। और कोरोनावायरस के ईलाज से बिल्कुल अलग थलग रखा गया है।

प्रश्न नंबर 5:- आपने अब तक बिहार सरकार और झारखंड सरकार और केंद्र सरकार को इस महामारी से बचाने के लिए क्या किया, अपना सहयोग देने के लिए संपर्क स्थापित किया है?

उत्तर :- इस कोरोनावायरस संकट को देखते हुए मैं ने तो सोशल मीडिया पर एक अभियान छेड़ दिया है। इतना ही नहीं, मैं ने सभी राज्यों के माननीय मुख्यमंत्रियों और स्वास्थ्य मंत्रियों और सेन्ट्रल हेल्थ मिनिस्टर तक को ईमेल कर दिया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही किसी ने संपर्क किया।