गाजीपुर:सियाराम उपाध्याय हत्याकांड में गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक, एडिशनल एसपी, सीओ एवं नोनहरा थाना के तत्कालीन तथा वर्तमान प्रभारी निरीक्षक के अलावा भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय के मोबाइल की कॉल रिकॉर्डिंग 9 सितंबर को सुबह से लेकर अब तक निकाल कर एसआईटी जांच में शामिल किया जाए। समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गाजीपुर के पूर्व जिला पंचायत सदस्य ब्रजभूषण दूबे ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी एवं पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण को मेल कर 15 बिंदुओं को सियाराम उपाध्याय हत्याकांड की जांच में शामिल किए जाने का अनुरोध किया है।
ब्रजभूषण दूबे ने प्रस्तुत बिंदुओं में उल्लेख किया कि पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ भाजपा के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय की कॉल रिकॉर्डिंग की गहनता से जांच में शामिल होने से पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मृतक सियाराम उपाध्याय के बड़े भाई शशिकांत उपाध्याय के मोबाइल का कॉल डिटेल्स एवं रिकॉर्डिंग भी निकलवाया जाए घटना के दिन से अब तक किन-किन लोगों से शशिकांत की बात हुई।
ब्रजभूषण दूबे ने डीजीपी और मुख्यमंत्री को प्रेषित ई-मेल में यह भी कहा कि 10 लाख रुपए जो मृतक परिवार को दिए गए हैं वह किसके द्वारा दिए गए? कब दिए गए रूपयों का श्रोत क्या था? वह नोट 500, 200, 100, 50 और किन प्रकृति के कितने-कितने थे।
ब्रजभूषण दूबे ने यह भी कहा कि विकलांग सियाराम उपाध्याय की मृत्यु के बाद उनके पिता गिरजा शंकर उपाध्याय के हस्ताक्षर से तीन पन्ने की हस्तलिखित तहरीर अपराध दर्ज करने के लिए दी गई थी जिन्हें पुलिस अधिकारियों के हाथों में देखा भी गया, उस पर अपराध दर्ज क्यों नहीं हुआ? उन्होंने यह भी कहा कि लाठी चार्ज में घायलों का पुनः मेडिकल परीक्षण कराया जाए जिससे साफ हो सके कि उन्हें कितनी चोट लगी है? उन्होंने विशेष जांच दल जांच दल से मांग किया कि चिकित्सीय पैनल का अभिमत चोट एवं एंटी मार्टम के अलावा चिकित्सकों का अभिमत वीडियोग्राफी का मिलान एवं विरोधाभास को विशेषज्ञों की टीम के साथ सत्यापित किया जाए।
श्री दुबे ने कहा कि सियाराम उपाध्याय के पोस्टमार्टम में क्या सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा प्रतिपादित नियमों का पालन किया गया है?
गिरिजा शंकर उपाध्याय के उस वक्तव्य को भी जांच का प्रमुख हिस्सा बनाया जाए जिसमें उन्होंने बताया कि मैं अपने बेटे को इलाज के लिए ले जा रहा था थाना पुलिस नोनहरा ने उन्हें डांट कर लौटा दिया। श्री दुबे ने यह भी कहा कि धरने के दौरान आंदोलनकारियों द्वारा दिए गए भाषण की रिकॉर्डिंग जो पुलिस द्वारा की गई है अथवा सोशल मीडिया पर है उसकी भी फोरेंसिक जांच कराई जाए। महत्वपूर्ण मांग करते हुए उन्होंने कहा कि थाना परिसर के 500 मीटर की परिधि में धरने के दौरान 9 सितंबर अथवा 10 सितंबर को सुबह 8:00 बजे तक कौन-कौन से मोबाइल नंबर प्रचलन में पाए गए उनकी भी जांच कराई जाए।
यह भी कहा कि सियाराम उपाध्याय के मोबाइल की भी फोरेंसिक जांच कराई जाए जिससे प्रतीत हो सके कि धरना के लिए उन्हें ले जाने वाला शख्स कौन है क्या कोई और साजिश इस घटना के मूल में तो नहीं है।
ब्रजभूषण दूबे ने यह भी कहा कि यदि जांच टीम चाहे तो मैं भी अपना बयान देने के लिए तैयार हूं हमें बयान देने से 72 घंटे पहले सूचित किया जाए।
ब्रजभूषण दूबे ने यह भी पूछा कि घटना के इतने समय बाद अब तक अपराध दर्ज न किए जाने के क्या कारण है और इसके लिए किस अधिकारी का उत्तरदायित्व होगा।
