गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद ब्लाक के बगेन्द में आयोजित श्री राम कथा में अयोध्या से पधारे महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 मानस मर्मज्ञ.भागवतवेत्ता श्री शिवराम दास उपाख्य फलाहारी बाबा ने अपने मुखारविन्द से मानस रूपी कथामृत की वर्षा करते हुवे उपस्थित श्रोताओं से कहा की भक्तों के प्रेम के कारण ईश्वर निरंकार से नराकार अव्यक्त से अभिव्यक्त सर्वत्र से एकत्र और उरवासी से उदर वासी बनता है।भगवान राम का अवतार रावण के लिए नहीं बल्कि विभीषण के लिए हुआ था। कृष्ण का अवतार कंस के लिए नहीं गीता गोपी और गाय के लिए हुआ था। भक्ति की इच्छा के अनुरूप ही भगवान रूप धारण करते है। कौशल्या के आदेशानुसार ईश्वर बाल रूप राम रूप धारण किये जैसे फ्रिज का तापमान जीरो डिग्री सेंटीग्रेड होता है तो निरंकार जल पात्र के अनुसार आकार प्रकार का रूपान्तरित हो जाता है ।परमात्मा बुद्धि से नहीं शुद्धि और समर्पण से मिलता है। फलाहारी बाबा ने कहा की दांपत्य यदि शुद्ध और विशुद्ध हो जाए तो ईश्वर माध्यम बनाकर अवतार ले लेता है ।सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना का विश्लेषण करते हुए आपने कहा कि भगवान के करुणा के आँसु पर भक्त भगवान के पास पहुंचता है। पर भक्तों के प्रेम रूपी आंसू पर भगवान भक्त के पास पहुंचने पर विवश हो जाता है। जीवन में श्रद्धा आस्था निष्ठा ही धर्म को प्रतिष्ठित करती है।बाबा ने कहा की ब्रह्म जानने की चीज नहीं मानने की चीज है। मानने पर स्वयं भान और ज्ञान हो जाता है। फलाहारी बाबा ने कहा की जीवन एक मैथ है श्रद्धा रूपी सूत्र पर सेट कर देने से मृत्यु रुपी उत्तर अनुकूल प्राप्त होता है। प्रहलाद जैसी निष्ठा हो तो पत्थर से भी भगवान प्रकट हो सकते हैं। जीवन में आस्था निष्ठा श्रद्धा और विश्वास का संचार होना चाहिए। राम कथा राम की कथा नहीं त्रेता की कथा नहीं बल्कि वर्तमान में हमारी आपकी पिता पुत्र पति पत्नी यानी रिश्तो की कथा है।राम का आचरण केवल प्रशंसनीय नहीं अनुकरणीय भी है।राम जन्म के प्रसंग के अवसर पर श्रोताओं की संख्या भारी रही।फलाहारी बाबा ने बताया की 20 नवम्बर से 25 नवम्बर तक बगेन्द में श्री रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।कलश यात्रा 20 नवम्बर को है।यज्ञ के लिए यज्ञशाला का निर्माण अपने अंतिम चरण में है।सभी आवश्यक तैयारियां अपने अंतिम चरण में है।
