करीमुद्दीनपुर:गोंड़उर में चल रहे यज्ञ के पांचवे दिन सुबह से ही यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।गाँव के अलावा क्षेत्र की जनता यज्ञ स्थल की परिक्रमा के लिए उमड़ पड़ी।अपने प्रवचन के दौरान यज्ञाचार्य त्रिदंडी स्वामीजी महाराज ने कहा कि राम का अवतार इस पृथ्वी पर लोगो में आचरण व्यवहार और मर्यादा स्थापित करने के लिए हुआ है।मर्यादा पुरुषोत्तम राम तो दया के सागर थे उनका आचरण ऐसा था कि वे अपने और पराये में कोई विभेद नही करते थे उनके हृदय में अपनी माता कौशल्या से भी अधिक प्रेम कैकेयी के लिए था।उनके हृदय में इतनी अधिक करुणा थी कि वे कैकेयी के कटु वचनों से तनिक भी आहत नही हुए और अपने पिता के वचनों को पूर्ण करने के लिए वनवास को उसी प्रकार सहर्ष स्वीकार कर लिया जिस प्रकार किसी मनुष्य को मानो अमृत मिल गया हो।रात में सुंदर रासलीला का आयोजन किया गया जिसे देखकर लोगो का मन विभोर हो गया।इस अवसर पर आचार्य कौशलेश झा बड़क शिवानंद आलोक प्रताप मिश्र अवनीश राय अखिलेश आदि मौजूद रहे।
