हवन यज्ञ व भंडारे के साथ हुआ श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का समापन

मुहम्मदाबाद:करीमुद्दीनपुर थाने क्षेत्र के गोड़उर गाव में चल रही छः दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ
शनिवार की रात सम्पन्न हो गया।यज्ञ के समापन के हवन यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। यज्ञ का आयोजन गंगा पुत्र स्वामी त्रिदंडी जी महाराज के नेतृत्व में किया गया था।

इस मौके पर स्वामी त्रिदंडी जी महाराज जी ने भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा।हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।

उन्होंने श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है।जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।त्रिदंडी जी महाराज ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है।

जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है।वही यज्ञ में चल रहे रासलीला में कंस का वध लीला का चित्रण किया गया।श्रद्धालु ने पात्रों की लीला देखकर भाव विभोर हो गए।यज्ञ समापन के दिन शनिवार को विधिविधान से पूजा करवाई। दोपहर तक हवन और भंडारा कराया गया।पूजन के बाद दोपहर से भंडारा शुरू हुआ और देर रात तक चला।जिसमे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।इस मौके पर यज्ञाचार्य कौशलेश झा,अवनीश राय रिंकू,अभिषेक मिश्रा, सुधीर कुमार राय, बंटी पांडेय,राहुल जितेंद्र राय ,मनोज राय राघवेंद्र उपाध्याय उर्फ बुच्चू बाबा आदि लोग थे।

(अजय कुमार यादव की रिपोर्ट)