शेरपुर गंगा कटान पर दुर्गेश उपाध्याय ने की ठोस पहल

गाजीपुर:गंगा कटान की मार झेल रहा शहीदों का गांव शेरपुर इन दिनों बड़ी त्रासदी से गुजर रहा है. हाल ही में आई बाढ़ और गंगा कटान की वजह शेरपुर के निवासियों का काफी नुकसान हुआ है और सैकड़ों बीघे खेत गंगा में समाहित हो चुके हैं. गांव के आम जन में इस समस्या को लेकर गहरा रोष है और इस मसले का ठोस हल निकालने की दिशा में अब प्रयास भी शुरु हो चुके हैं. इसी क्रम में शेरपुर कलां के ही निवासी दुर्गेश उपाध्याय जो कि पूर्व बीबीसी पत्रकार हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के उ.प्र. एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण में मीडिया सलाहकार के रुप में सेवाएं दे रहे हैं, उन्होंने इस मसले का ठोस हल निकालने के लिए शासन में बातचीत शुरु कर दी है. शेरपुर गंगा कटान के मुद्दे पर दुर्गेश उपाध्याय ने लखनऊ में सिंचाई विभाग के आला अफसरों से बातचीत की है और एक पत्र प्रमुख अभियंता सिंचाई और जल संसाधन विभाग को सौंपकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है. इधर उनकी इस विषय में जिलाधिकारी गाजीपुर से भी वार्ता हुई है. शीघ्र ही जिले से प्रस्ताव बनाकर शासन में भेजने की तैयारी चल रही है. इसके साथ ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा हाल ही में मौके पर दौरा भी किया गया है और आने वाले दिनों में भी विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का जायजा लेंगे.
सूच्य है कि ऐतिहासिक धरती शेरपुर जो कि तहसील- मोहम्मदाबाद के अंर्तगत गंगा नदी के बांये तट पर स्थित है. इस गांव के अंतर्गत सेमरा, शिवराय का पुरा, बच्छलपुर, सुभाषनगर छानबे इत्यादि छोटे छोटे टोले-माजरे अवस्थित हैं. पूर्व में गंगा नदी इस गांव से लगभग 1 किमी दूर बहती थी लेकिन पिछले 10 सालों में नदी लगातार कटान करते हुए गांव के बिल्कुल नजदीक से बहना शुरु हो गई है. सर्वाधिक प्रभावित सेमरा में कटाव निरोधक कार्य सिंचाई विभाग द्वारा पूर्व में कराए गये हैं. वर्तमान में गंगा नदी सेमरा से नीचे स्थित मौजे शेरपुर में बड़ी मात्रा में कटान हो रही है. इस कटान को बचाने के लिए उ.प्र. सरकार द्वारा 1.5 किमी ठोकर का निर्माण किया गया था. जिसे बाद में 500 मीटर और बढ़ाया गया लेकिन स्वीकृत ठोकर को अपर्याप्त मानते हुए कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग गाजीपुर ने 2 किमी के ठोकर को आगे पूर्व की दिशा में 3 किमी अतिरिक्त ठोकर बनाने का प्रोजेक्ट बनाया है. जो स्वीकृत होकर उस पर पैसा भी आवंटित हो चुका है. क्यों कि गत फरवरी, मार्च 2021 में उक्त 3 किमी क्षेत्र में पालिथीन बैग पर कुछ खर्च भी हुआ है लेकिन कतिपय कारणों से कार्य पूरा नहीं हो पाया जिससे इस साल कटान और ज्यादा बढ़ गयी है.