नारी केवल नाम नही , है साहस …’, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कंचन कुमारी का कविता जो दिल छू लेगा

 

 

लखनऊ:देश आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका परिधि में नहीं, बल्कि केंद्र में रही है। आज समाज की हर दृश्यमान उपलब्धि के पीछे महिला संचालित एक आधारशक्ति अनवरत कार्य कर रही है, जिसका नाम है-देखभाल की अर्थव्यवस्था यानी केयर इकोनमी। यह वह मौन ऊर्जा है, जो भारत के अस्तित्व को हर पल संबल प्रदान करती है।  यह कहना समाजिक कार्यकर्ता कंचन कुमारी का कहना है। दैनिक फार मीडिया के बातचीत में अपनी कविता की चर्चा की । जो इस प्रकार है..

 

नारी शक्ति रूप अपार। :—

नारी केवल नाम नहीं, है साहस की पहचान,
धूप में जलकर भी रखे,अपने चेहरे पर मुस्कान..!
झुकती है तो प्रेम से ,उठती है तो शान,
यूं ही उसको दुर्गा नहीं,कहता है सारा जहान..!
नारी केवल देह नहीं, शक्ति का रूप अपार,
धूप जले संसार मे,वह रहे उजियार..!
सहनशीलता सागर सी,साहस पर्वत-धार,
यूं ही उसको दुर्गा नहीं कहता है सारा संसार..!
जो नारी का मान करे,”कंचन” वही सच्चा इंसान,
उसके चरणों मे ही बसता, है जग का सम्मान..!

कंचन कुमारी