इस्लाम धर्म के संस्थापक हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम मदीने से 28 रजब को अपने अहलोअयाल से रुक्सत हो कर अपने असहाब और अंसार के साथ 2 मोहर्रम को करबला की सरज़मीन पर पहुचे। मोहम्मदाबाद तहसील के अरजानीपुर गांव में सैयद क़ाबिल हुसैन के इमामबारगाह में सोज़ख़्वानी सैयद अली मेंहदी हुसैनी व हमनवा ने की तथा मरसिया ख्वानी सैयद खुर्शीद हैदर हुसैनी ने अपने पुरदर्द अंदाज में किया। अंजुमन अहसनिया के सदस्यों ने सीनाजनी व नौहाख्वानी कर के इमाम साहब का पुरसा पेश किया।

