भक्ति में मन लगाने से ईश्वर की कृपा निश्चित ही प्राप्त होती है: फलाहारी बाबा

गाजीपुर जनपद के बगेन्द में आयोजित सरस संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में अपने मुखारविन्द से भागवत रूपी कथामृत का श्रोताओं को रसपान कराते हुवे अयोध्या वासी मानस मर्मज्ञ भागवत्वेत्ता महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 पूज्य फलाहारी जी महाराज ने अमर कथा एवं शुकदेव के जन्म का विस्तार से वर्णन किया। फलाहारी जी महाराज ने कहा कि वेद रूपी वृक्ष का पका हुआ फल ही श्रीमदभागवत कथा है। उन्होंने कहा कि जीवन में सत, रज, तम तीन तरह के गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि सतोगुणी मनुष्य के ह्रदय में ईश्वर निवास करते है और सतगुण ही परमात्मा से मिलाने का एकमात्र माध्यम है।

बगेन्द में आयोजित सरस संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में फलाहारी जी महाराज ने कहा कि रजोगुण में आप जो देखेंगे और आपका जैसा मन करेगा आप वही करेंगे। रजोगुणी वाला मनुष्य सतोगुणी हो सकता है मगर तमोगुणी वाला जीव सतोगुणी नही हो सकता है।

बिना साधना के भगवान का सानिध्य नहीं मिलता। द्वापर युग में गोपियों को भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य इसलिए मिला, क्योंकि उन्होंने त्रेता युग में ऋषि-मुनि के जन्म में भगवान के सानिध्य की इच्छा को लेकर कठोर साधना की थी। शुद्ध भाव से की गई परमात्मा की भक्ति सभी सिद्धियों को देने वाली है। जितना समय हम इस दुनिया को देते हैं, उसका पांच फीसद भी यदि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लगाएं तो भगवान की कृपा निश्चित मिलेगी। उक्त बातें पूज्य फलाहारी बाबा ने कही। परमपूज्य फलाहारी बाबा ने कहा कि गोपियों ने श्रीकृष्ण को पाने के लिए त्याग किया परंतु लोग चाहते है भगवान बिना कुछ किए ही सारा फल दे दें, जो की असंभव है।

भक्ति को जीवन में उतारो कल्याण ही होगा

फलाहारी बाबा ने कहा कि हरी का भजन कल से नहीं आज से ही करो, बल्कि यह शुभ कार्य अभी से ही करो। भगवान की भक्ति को अपने जीवन में उतारो आपका कल्यान निश्चित होगा। सभी भगवान को मानते है, उनकी पूजा करते हैं। लेकिन आज लोग उनपर विश्वास नहीं करते हैं।

फलाहारी जी ने श्री शुकदेव भगवान के जन्म व भगवान शिव व माता पार्वती की अमर कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने पार्वती जी को जो अमर कथा सुनाई वही श्रीमद भागवत कथा थी।उन्होंने कहा कि शिव कथा सुनते पार्वती को निद्रा आ गई लेकिन शुकदेव ने पूरी कथा सुन ली थी । चुपके से अमर कथा सुन लेने के कारण शिव जी ने उन्हें मारने के लिए दौड़ाया तो वह एक ब्राह्मणी के गर्भ में छुप गए। व्यास जी के निवेदन पर भगवान शिव इस पुत्र के ज्ञानवान होने का वरदान दे कर चले गए।कथा में ग्राम प्रधान बगेन्द मनीष राय ने ब्यास पूजन किया।उन्होने महाराज श्री का अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मान किया।पूजन आचार्य द्वय
मदन मोहन द्विवेदी एवं मोहित कुमार मिश्रा
के द्वारा कराया गया।कथा में चर्चित गायक रिंकू रसिया वाराणसी के द्वारा एक से बढ कर एक भजनों की शानदार प्रस्तुति की गयी।वादक के रूप में तबला बादक गोल्डी तिवारी एवं गायक प्रमोद कुमार ने संगत की।कथा में डाक्टर श्रीकांत राय मुख्य यजमान एवं भागवत् प्रेमी श्रोता उपस्थित रहे।