गोंड़उर में चल रहे भागवत कथा के दूसरे दिन श्री त्रिदंडी स्वामीजी महाराज ने कहा कि मानव का कर्म ही उसे दानव या देवता बनाता है सत्कर्म वह है जो वेद पुराण शास्त्रोचित हो।हमारा शास्त्र कहता है कि मानव सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।गरीब असहाय और संत की सेवा मात्र करने से भगवान प्रसन्न होते और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।स्वामीजी ने कहा कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या करने की कोई आवश्यकता नही है गृहस्थ जीवन में रहकर प्रभु का स्मरण और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करने मात्र से भगवान प्रसन्न होते है और उन्हें बैकुंठधाम मिलता है।इस अवसर परअधव राय बबलू राय प्रताप मिश्र दिनेश राय पंकज राय महेश गुप्ता अविनाश आदि मौजूद रहे।
