करीमुद्दीनपुर।थाना क्षेत्र के गोंङउर में चल रहे सात दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को पूजा अर्चना तथा परिक्रमा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।यज्ञाचार्य त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने बताया कि यज्ञ स्थल के परिक्रमा करने से जन्म-जन्म के पापों का नाश होता है और संपूर्ण तीर्थ का फल प्राप्त होता है। यज्ञ के बारे में बताया कि यज्ञ साक्षात भगवान है , ब्रम्ह वैवत पुराण के अनुसार, यज्ञ नहीं होगा तो वृष्टि नहीं होगी , वृष्टि नहीं होगी तो मनुष्य नहीं होंगे।
आगे बताया कि व्यक्ति को पद मिलने पर अगर मद आवे तो समझो विनाश निश्चित है। पद जो भी मिले उसे प्रसाद समझ के सेवा करनी चाहिए।प्रसाद किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं होता।सबके लिए होता है।इसलिए आप कोई भी पद प्राप्त होता है तो उसे प्रसाद समझकर सेवा करनी चाहिए । अगर वह ऐसे करता है तो अनेक वर्षों तक पद पर बना रहेगा। जहां अपना समझकर राज करोगे तो धीरे धीरे पतन की तरफ चला जाओगे।क्योकि राजा के लिए पूरी प्रजा पुत्र के समान है।राजा वहीं श्रेष्ठ है जिसके राज्य में धर्म का उत्थान हो।वहीं आचार्यों द्वारा किए जा रहे वैदिक मंत्रों के उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इस दौरान प्रवचन, रामलीला एवं रासलीला कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इस मौके पर यज्ञ के आचार्य कौसलेश झा,बड़क,छेदी,सिवानंद,आलोक,
प्रताप मिश्रा ,अखिलेश ,आनंद ,बिटू,प्रदीप ,मोहन
समेत काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
