मुहम्मदाबाद: गोवर्धनका अर्थ है गौ संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गौ संवर्धन से ही हो सकता है।बगेन्द गाव में चल रही श्रीमदभागवत कथा में कथावाचक शिवराम दास महाराज उपाख्य फलाहारी बाबा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा, कर्म तो हमें करना ही होगा।
कथावाचक ने गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाते हुए कहा कि इंद्र के कुपित होने पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठा लिया था। इसमें ब्रजवासियों ने भी अपना-अपना सहयोग दिया। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए राक्षसों का अंत किया तथा ब्रजवासियों को पुरानी चली रही सामाजिक कुरीतियों को मिटाने एवं निष्काम कर्म के जरिए अपना जीवन सफल बनाने का उपदेश दिया। इस मौके पर मंदिर प्रांगण में गिरिराज पर्वत की झांकी सजाई गई एवं अन्नकूट एवं छप्पन भोग लगा कर श्रद्घालुओं को प्रसादी वितरित की गई। इस मौके पर
आचार्य द्वय पं मदनमोहन द्विवेदी व पं विकास शास्त्री,डा बलीन्द्र,राम इकबाल यादव,अनूप तिवारी,गोल्डू तिवारी, प्रमोद यादव,रिंकू रसिया,राजेश राम,राजेश राय पिन्टू आदि लोग रहे।
